Thursday, July 18, 2013

सात साल की दुनिया


रोहन, रोहन उठो, जल्दी करो स्कूल बस आने वाली है। रोहन ने मम्मी की आवाज सुन कर अपनी छोटी छोटी पलके खोली। खिड़की से बाहर देखा, "ये आसमां पर ढेरो रुई का ढेर कौन रख जाता है कभी लगता है जैसे बहुत सी भेड़े किसी ने मैदान पर खुली छोड़ दी हो, लगता आज बारिश होगी।"

सात साल का रोहन दूसरी कक्षा का छात्र है। आज बड़ा उत्साहित है अपने सहपाठी स्पर्श को अपने नये स्कूल बैग की नुमाइश जो करनी है। कुछ देर बाद बस रुकी, स्पर्श अपनी मम्मी को बाय करता हुआ बस पर चढ़ गया और उसकी नज़रे बस में बैठे सभी चेहरो की मुस्कान को रसीद देते हुए रोहन पर ठिठक गयी। भाग कर रोहन द्वारा रोकी हुयी सीट पर बैठते ही नए बैग का अभिमुल्यन करते हुए अपनी जेब से एक लिफाफा निकालता हैं। 

रोहन: "ये क्या है"? 
स्पर्श: "ये लैटर है पापा ने कहा था की स्कूल के बाहर जो रेड पोस्ट बॉक्स है उसमे डाल देना, दादाजी को लिखा है।"
रोहन: "स्पर्श ये लैटर कैसे सही पते पर पहुँच जाता है?"
स्पर्श: "हर पोस्ट बॉक्स के नीचे सुरंग होती है जहाँ से लैटर फिसलता हुआ आपके गाँव चला जाता है।"
रोहन: "लेकिन उसे पता कैसे चलता है की कहाँ जाना है, दादी के घर जाना है या नाना के गाँव?"
स्पर्श: "क्या यार ये भी नहीं पता! जब पेट में दर्द होता है तो दवाई लेने पर पेट दर्द ही ठीक होता है, वही दवाई दांत में दर्द होने पर दांत के दर्द को ठीक करती है, क्योंकि दवाई को पता होता है की पेट में जाना है या दांत में। ऐसे ही लैटर पर पता लिखा होता है इसलिए लैटर को पता होता है की कहा जाना है।" 

द्वितीय कालांश (पीरियड) में गणित के अध्यापक ने अपनी अकर्मण्यता पर लीपापोती करने के लिए उदघोष किया की आज सभी बच्चे होम वर्क क्लास में ही कर ले ताकि घर पर होने वाली ग़फ़लतो की समीक्षा यही हो सके (ताकि अध्यापक थोडा आराम कर सके)। बच्चो को और क्या चाहिए, 'अध्यापक और छात्र', दोनों ही पक्ष एक ही अनुयोजन से आनन्दित होते है की पढाई ना हो, तो फिर ऐसा प्रतिदिन क्यों नहीं होता? स्पर्श ने रोहन को अपन टिफिन खोल कर बताया की उसकी मम्मी ने आज उसके लिए उसके पसंदीदा कूकीज और चॉकलेट रोल्स रखे है। अब स्पर्श के साथ रोहन भी लंच ब्रेक का अधीरता से इंतज़ार करने लगा।सभी बच्चो के कानो मैं सुरीली मध्यांतर की घंटी गूंजी, एक साथ सधे कदम कक्षा के दरवाजे की तरफ तीव्रता से बढे मानो कोई अदृशय शक्ति उनका संचालन कर रही हो, सारे आपसी मन-मुटाव जो पिछले चार कालांशो से फल फूल रहे थे, पानी के बुलबुलों की तरह बिखर गए। रोहन और स्पर्श भी हाथ-मुहँ धो कर कक्षा में आये ताकि उनके आज के ध्येय की पूर्ति कूकीज और चॉकलेट रोल्स खा कर पूरी हो सके।

"ये क्या मेरा लंच कहाँ है, अभी तो टिफिन मैं था अब कहाँ गया?" स्पर्श बोखलाया। उसके टिफिन से खाना अलोप हो चूका था। सरगर्मी बढ़ गयी हुजूम इकठ्ठा हो गया दूर-दूर की कक्षाओ और अनुभागो (सेक्सन) से बच्चे आने लगे, कोई सहानुभूति देता, कोई कौतुहल व्यक्त करता तो कोई ठिठोली करता और कोई-कोई तो नेतागिरी से भी बाज नहीं आया। क्लास टीचर के दखल के बाद बच्चो के मनोरंजन के इस कारण पर रोक लगी, आगे से एहतियात रखने के हिदायत के साथ स्पर्श को, रोहन और बाकी बच्चो के खाने को साँझा करने के लिए कहा गया। 

अगले दिन मध्यांतर में टिफिन खोला गया, खाना फिर से नदारद! अब ये कोई संयोग नहीं हो सकता, पूरी कक्षा सकते में आ गयी, अचरज ये था की दुसरे दिन भी स्पर्श का ही खाना गायब क्यों हुआ जबकि और भी तो टिफिन थे वहां। स्पर्श को रोना आ गया, रोहन और बाकि बच्चो ने दिलासा दी। स्कूल प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया। चाक-चोबंदी बढ़ गयी। कुछ बच्चे जो टीवी पर प्रसारित होने वाले डिटेक्टिव सीरियल 'सुपर सिक्स' से प्रभावित थे ने आपस में गोपनीय जत्था तैयार किया गया जो लंच-ब्रेक में छुप कर निगरानी करेगा की इस कौतुक का स्वामी कौन है। जत्थे के छात्र लंच-ब्रेक में खेल-कूद के साथ-साथ कुछ समय के अंतर से कमरे के बाहर मंडराने लगे। 

स्कूल का चपरासी इधर-उधर तांक-झाँक करने के बाद सीधे कमरे में चला गया और वहां रखें स्पर्श के टिफिन को हाथ में उठा लिया। 
"चोर चोर चोर", गोपनीय जत्थे के बच्चे एक साथ चिल्लाते हुए कमरे में आ धमके, चपरासी का चेहरा रंगहीन हो गया, लडखडाई जुबां को सँभालते हुए बोला, क्या हुआ? मैंने क्या किया?
"आपने स्पर्श का खाना चुराया है" 
"नहीं, मैं नहीं हूँ खाना चोर, मैं तो केवल ये देखने आया था की खाना आज भी चोरी हुआ या नहीं"
" नहीं आप झूठ बोल रहे हो देखो आपके मुह पर अभी भी खाना लगा है और टिफिन में भी खाना नहीं है"
"मैं अपना लंच लेने के बाद ही यहाँ आया था, जल्दबाजी मैं मुह साफ़ नहीं किया और खाना तो पहले से गायब था, मुझे भी टिफिन खोलने पर मालूम चला" 

बात प्रधानाचार्य तक पहुंची, चपरासी को आड़े हाथो लिया गया। बच्चो को कुछ दिनों के लिए कयास लगाने और मस्तीखोरी करते हुए ढींगबाज़ी का बहाना मिल गया था। स्कूल के बाहर पहाड़ भी टूट जाए तो बच्चे इस घटना को उपेक्षित कर देते है लेकिन स्कूल के अन्दर सुई भी गिर जाए तो अंतहीन ठहाके लगने लगते है। जांच पड़ताल करने पर चपरासी को इस आधार पर छोड़ दिया गया की जब कल वो अवकाश पर था तब भी लंच ब्रेक में खाना गायब हुआ था। और अगले दिन भी (चपरासी के पकडे जाने के बाद का दिन) स्पर्श का लंच गायब हैं! यानी गुनहगार कोई और ही है।

रोहन ने घर पर अपने 11 वर्षीया भाई को इस विषय में बताया। उसका बड़ा भाई कपिल जिसे खुफियागिरी और अटपटी बातों में कुछ ज्यादा दिलचस्मी थी, उसने सम्भावना व्यक्त की हो सकता है मंगल गृह से एलियंस धरती पर कब्ज़ा करने के इरादे से आ पहुंचे हो और उनका पहला निशाना तुम्हरा स्कूल हो, उसके बाद धीरे-धीरे उनका आतंक पूरी दुनिया पर फ़ैल जाएगा और किसी का भी खाना कभी भी गायब हो जाएगा।
"भैया अब हम क्या करे" 
"तू घबरा मत, मैंने एक मूवी में देखा था की एलियंस से कैसे निपटा जाता है, लेकिन तुझे अब चौकन्ना रहना होगा क्योंकि हम चारो ओर से घिर चुके है, कभी भी मारे जा सकते है।"
"भैया मुझे डर लग रहा है"
"अब बात बहुत आगे निकल चुकी है, डरने का वक़्त अब ख़त्म हुआ, अब हम दोनों के कंधो पर पूरी दुनिया की जिम्मेदारी है, दुनिया को बचाना है"

रोहन समझ नहीं पा रहा था की दुनिया बचाए या स्पर्श का खाना। अभी होमवर्क भी तो करना है, होमवर्क करने के बाद दुनिया की चिंता करना ठीक रहेगा। एलियंस धरती पर कब्ज़ा कर ले तो अच्छा ही रहेगा, कम से कम ये होमेवर्क से तो पीछा छुटेगा, कोई इतना होमवर्क भी देता है क्या? घर के सामने चाय वाला कितना 'लकी' है, बरगद के पेड़ के नीचे चाय की स्टाल हैं दिन भर मजे से बैठता है ना स्कूल जाने का प्रेशर ना होमवर्क का हौव्वा। आने जाने वालो को चाय पिलाता है, चुस्कीयो के साथ देश-विदेश के किस्से चलते रहते है, कभी भूत-प्रेत की बाते कभी गाँव के मेले या किसी ज़माने के राजा की शादी के भव्यता की चर्चा, कितना मज़ा आता है, पैसे कमाता है वो अलग। यहाँ दिन रात आँखे फोड़ते रहो, आने जाने वाले भी सलाह देते रहते है बेटा खूब पढ़ा करो, पढने की उम्र है। बर्फ से ठंडी रातों में (सुबह जल्दी) उठना पड़ता हैं पहले पीरियड से ही लंच-ब्रेक और लंच-ब्रेक के बाद छूट्टी का इंतज़ार रहता है। अभी एक एग्जाम कम्पलीट भी नहीं होता की दुसरे का टाइम टेबल मिल जाता गर्मियों की छुट्टियों में भी होमवर्क का भूत पीछे लगा देते हैं।

अगले दिन बस में रोहन, स्पर्श से मिला, विचारशील बातें हुयी।
स्पर्श: "क्या आज भी मेरा लंच चोरी हो जाएगा या चोर का पता चलेगा?, मैंने तो अभी तक डर के कारण मम्मी को नहीं बताया, हा मेरी दीदी (जो 12 साल की है) को बताया तो उसने कहा की खाने में नींद की दवाई मिला दो, जो खायेगा उसे नींद आ जायेगी और पकड़ा जाएगा, ये आईडिया उन्हें एक टीवी सीरियल से आया था, लेकिन नींद की दवाई कहाँ से आये?" 

रोहन: "मेरे भैया बता रहे थे की ये सब एलियंस कर रहे है, एलियंस के बारे में उन्होंने टीवी पर देखा था, मुझे समझ नहीं आता की लोग इतनी छोटी टीवी के अन्दर कैसे घुस जाते है, एक बार मम्मी-पापा बाहर गए थे तो मेरे भैया ने ये देखने के लिए पीछे से टीवी खोल दिया था, पर वहां कोई नहीं दिखा, मम्मी पापा की डांट के बाद भैया भी कई दिनों तक टीवी के पास नहीं दिखे हा हा हा।"

आज गोपनीय जत्थे का नामकरण दिवस है। गुपचुप तरीके से सुझाव लिए जा रहे है। हर तरफ गहमा-गहमी है की खाना चोर कौन है? कब पकड़ा जाएगा? स्पर्श के लंच के पीछे ही क्यों पड़ा है? 'खाना चोर' परम मसालेदार विषयो के श्रेणी मैं आ चुका था। 

गोपनीय जत्थे ने आज बिसात बिछा दी, पीछे वाली बेंच के नीचे एक बच्चा छुप कर बैठ गया, एक दरवाजे के पीछे खड़ा है, कक्षा के सभी बच्चो के लंच बॉक्स बेग से निकाल कर सजा कर रख दिए, कुछ एक के तो टिफिन के ढ़क्कन भी हटा दिए, कक्षा के बाहर से भी निगरानी के पूरे इंतजामात कर दिए गए। आज तो शिकार फंसेगा। हाथी की मदमस्ती में विशाल कमरे में आया और पहले से ढक्कन हटे हुए बॉक्स में से एक चम्मच पुलाव मुहँ के हवाले करने ही वाला था की अप्रत्याशित जन्मदिवस समारोह की तरह पूरा कमरा रौशनी के झमाके के साथ गूँज उठा। विशाल पकड़ा गया!

"मुझे क्यों पकड़ा है मैंने क्या किया"
"हम सब ने तुम्हे रंगे हाथों पकड़ा हैं, तुम ने जिस टिफ़िन से पुलाव लिए थे वो तुम्हारा नहीं था, फिर तुमने क्यों लिए?"
"माना ये मेरा टिफ़िन नहीं है पर अब जब कोई ढक्कन हटा कर इतने स्वादिष्ट खाना सजा कर रखेगा तो किसका मन नहीं ललचाएगा की एक चम्मच टेस्ट तो करे, खाना सिर्फ स्पर्श का चोरी होता है और फिर ये स्पर्श का टिफ़िन भी तो नहीं है।" 

लगा जाल मैं फंसी मछली हाथ से फिसल कर फिर से पानी में कूद गयी, गोपनीय जत्थे का नाम 'फ्लाइंग आईज' फाइनल हुआ। छुट्टी के बाद रोहन रेडियो पर बज रहा गीत गुनगुनाता है " चौधरी का चाँद है या किताब हो" स्पर्श को हंसी आ गयी। "ये क्या गा रहा है, पहले मैं भी चौधरी का चाँद ही समझता था एक दिन पापा ने बताया की 'चौहदवी का चाँद है या आफ़ताब हो' होता है। माहौल में हल्कापन आ गया। 

रोहन: "तू अपने पापा से बहुत क्लोज है" 
स्पर्श: "हां कई बार जब मैं पढाई करता हूँ तो पापा भी मेरे साथ पढने लग जाते है, पापा भी तो कोई एग्जाम की तैयारी कर रहे है, कहते है की एग्जाम क्लियर करने पर प्रमोशन हो जाएगा।" 
रोहन: "क्या अंकल अभी तक पढाई करते है, हे भगवान क्या मैं 30-35 साल तक पढता रहूँगा क्या? कितनी अजीब बात है की हम अपनी आधी जिंदगी स्कूल, कॉलेज के अन्दर ये सीखने में बिता देते है की हमें बाकि बची आधी जिंदगी को बाहर कैसे जीना है हा हा हा।"

अगले दिन दोनों बस से स्कूल आ रहे थे, रोहन ने गौर किया की स्पर्श अपना खाना रहस्यमयी रूप से बस की खिड़की के बाहर फैंक रहा है।
"ये क्या कर रहे हो स्पर्श, इसका मतलब तू रोज़ अपना खाना बस के बाहर फैंक देता है, और कलंक किसी काल्पनिक खाना चोर पर लगा देते है"

"सॉरी रोहन, प्लीज किसी को मत बताना"
"लेकिन तू ऐसा क्यों करता है"

"मेरी मम्मी मुझे पोषक खाने का हवाला देते हुए,कद्दू, पालक, घीये आदि की सब्जी देती है, जो मुझे पसंद नहीं, बचा हुआ खाना घर ले जाता हु तो डांट पड़ती है, एक दिन जब खाना वाकई मैं चोरी हो गया था और टीचर ने कहा की रोहन और बाकी लोगो का खाना शेयर कर लो, तब मुझे लगा की मेरे अलावा बाकी बच्चे कितना यम्मी खाना लाते है, साथ ही इतनी वैरायटी भी मिल गयी, इसलिए मैंने ये सब शुरू किया ताकि मुझे घर से लाया खाना खाने की बजाय रोज़ ये सब खाने को मिले। लेकिन मुझे आज तक ये समझ में नहीं आया की उस दिन तो मेरा फ़ेवरेट चॉकलेट रोल्स और कूकीज थे वो किसने चोरी किये थे।"

"वो मेने चोरी किये थे" रोहन मुस्कुराया। 


रचियता: कपिल  चाण्डक 
Author: Kapil Chandak


Image Courtesy : Google  
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